गंगाजल…

गंगाजल की भी
अपनी ही महिमा है।
तभी बिकने लगा है
आजकल
जाने किस मिट्टी का है
इन्सान यहाँ !
मिट्टी तो छोड़ी नहीं
अब गंगाजल भी नहीं छोड़ेगा।
बात अच्छी भी है कि
अब खतों के साथ डाकविभाग में
गंगाजल भी उपलब्ध रहेगा।
🙂🙂🙂🙂

Comments

16 responses to “गंगाजल…”

  1. क्या बात है अच्छा तंज कसा है आपने

  2. This comment is currently unavailable

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    व्यंग्यपरक, भावपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति

    1. जी धन्यवाद

  5. अच्छा व्यंग्य है

  6. Priya Choudhary

    Bilkul sahi 👍

  7. Rishi Kumar

    बहुत अच्छा

  8. Pratima chaudhary

    यथार्थ परक बहुत सुंदर

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद

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