गरिमामयी माँ

एक ही शब्द में ब्रह्मांड समाये
देवों ने भी मस्तक हैं झुकाये
अपने अंदर नव जीव बनाये
अंधा निःस्वार्थ प्रेम भी समाये
जीवन में हर पल साथ निभाये
हर कठिनाई में खड़ी हो जाये
यमराज से भी जो लड़ जाए
हर परीक्षा में सफल हो जाये
जीवन के नए पाठ भी पढ़ाये
अपने अनुभव से हमको सिखाये
पहली गुरु माता भी कहलाये
जीवन हम सबका उज्ज्वल कराये
ऐसी गरिमामयी माता को हम भी
शत बार अपना शीश झुकाये।।

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