गलियारों में अंधियारे…

गलियारों में अंधियारे हैं
निश्चित ही सब दुखियारे हैं
नहीं हैं खाने को कुछ दाने
दूर दूर से सब प्यारे हैं
कर्तव्यों की बलिवेदी पर
बैठा है कोई शस्त्र पकड़कर
पर दुनिया की रीत यही है
जो हैं निर्लज्ज वही प्यारे हैं।
गलियारों में अंधियारे हैं
निश्चित ही सब दुखियारे हैं।

Comments

4 responses to “गलियारों में अंधियारे…”

  1. Amita

    सुंदर प्रस्तुति

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

  2. रोहित

    बहुत सुन्दर रचना

Leave a Reply

New Report

Close