गुलशन फिज़ाओ में यूं ही नहीं महकते हैं
इश्क की बूंदाबांदी से खिल उठते हैं
एहसास की रोशनी से महक उठते हैं
गीत यूंही नहीं बना करते
दिल के जख्मों को हरा करते हैं
गीत यूँ ही नहीं बना करते
Comments
8 responses to “गीत यूँ ही नहीं बना करते”
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Nice
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थैंक्स
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Nice
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धन्यवाद
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Nyc
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थैंक्स
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वाह
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बहुत सुंदर
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