गुड्डी भी सुलझा लेंगे

नींदें हैं आजकल ना जाने क्यों रूठी हमसे
वो मिलेगा तो यह गुत्थी भी सुलझा लेंगे

Comments

4 responses to “गुड्डी भी सुलझा लेंगे”

  1. बहुत सुंदर पंक्तियां

  2. बहुत बेहतरीन

  3. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

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