गुरुर

इतना गुरुर ना कर अपनी खुबसुरती पड़
यह तोह उम्र के साथ चला जायेगा
जितना उस खुदा ने प्यार और शिद्दत ने तुझे बनाया
काश उतना अच्छा दिल दिया होता
तोह इतनी ज़िंदगियां बर्बाद ना होती

Comments

7 responses to “गुरुर”

  1. ashmita Avatar

    बहुत अच्छी कविता

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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