गुरु

गुरु ज्ञान भण्डार समेटे, कभी न अपनी आँखे मींचे,

शिक्षा के दीपक प्रकाश से हर जन के जीवन को सींचे,

गुरु न देखे जाति धर्म, न मन में कोई संशय कीजे,

गुप्प अँधेरे में भी दृढ सन्कल्प में उसका हर क्षण बीते।।
राही (अंजाना)

Comments

4 responses to “गुरु”

  1. Mahtab Avatar
    Mahtab

    sach baat hai

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