नटखट नन्हेचुलबुल पांडे ,
भोली बातों से जो रिझाते ,अक ड दिखा के डर से भोले बन जाते।
डांटने वाले आंखें दिखाते मन ही मन मंद मंद मुस्कुराते,
और कभी हंसी रोकते रोकते फट पड़ती हंसी के ठहाके लगाते ।
बेहद प्यारे चटपटे करारे पटाखे। गाल है जैसे फूल ऐसे गुब्बारे
लाड़ लड़ाते अपना बनाते शहद में डुबोकर बातें बनाते नन्ही नन्ही छोटी मोटी लड़ाई बात-बात में जो अकड़ दिखाई ।
दिनभर फैसलों में बीत जाता समय जब गुरु के समक्ष अदालत लगाते ।
मीठी सी झीड़की जो बस डर ही जाते,
तुरंत आपस में हाथ मिलाते सॉरी मैम कहकर आंखे झुकाते।
बेहद ही प्यारी नहीं कोई जोड,
गुरु शिष्य की जोड़ी बड़ी
निमिषा सिंघल
Tag: गुरु पर कविता हिंदी में
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गुरु शिष्य
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गुरू
गुरू वन्दन
गुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
मैं हूं बड़ा अभागा संसार में
ज्ञान कि ज्योति जलाये रखना
जीवन के अंधियारो में
प्रकाश का दीप जलाये रखनागुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
मैं हूं एक छोटा सा तिनका
अपने शरण में रखना मुझको
ज्ञान कि सागर से मुझको
आशीष समर्पित करते रहनागुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
नई राह नई दिशा दिखला कर
हमको नेक काबिल इंसान बना देना
अंधेरे में एक दीप जलाकर
जीवन पथ पर चलना सीखा देनागुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
मेरे पथ को रोशन करना
जीवन को सफल बना देना
धैर्य सौर्य ज्ञान का पाठ पढ़ा कर
हमको भव से पार लगा देनागुरू वन्दन चरणों में करता हूं
शीश झुका कर अभिनन्दन करता हूं
जीवन के पथ पर सदैव हमें
हे गुरुदेव अग्रसर रखना
जीवन के अंधियारे में ज्योति जलाते रहना
अज्ञानता को दुर करके मेरे ज्ञान का दीप जलानामहेश गुप्ता जौनपुरी
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गुरू वन्दन
गुरु वन्दन
हम सब गुरु के गोद में
छात्र है गुरु के ज्ञान में
आओ हम सब गुरु वन्दन करे
चरण स्पर्श अभिनन्दन करे।गुरु का हमपे उपकार है
हम सब उनका सम्मान करे
जंगल में कुटी तले
ज्ञान पाये हम सभी।ज्ञान से गुरू का मान करे
गुरु से हम सब स्नेह करे
अन्धकार मिटाकर प्रकाश दिये
समाज में अधिकार दिये ।गुरु से हम सब ज्ञान पाये
लेकिन सोचा नही क्या पाये
स्वार्थी हम सब हो गये
कभी ना हम सब गुरु से मिलने गये।हम सब गुरु से पराये हुए
शिक्षा की ज्योति पाकर
एक अच्छे गुरु के चरणो को
महेश बारम्बार प्रणाम करे।महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864✍✍✍✍✍✍✍✍✍
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गुरु का स्थान
सर्वप्रथम गुरु का स्थान।
तत्पश्चात पूज्य हैं भगवान।प्राचीन काल से ही,
गुरुओं ने दिए संस्कार।
किताबी ज्ञान के साथ,
सांसारिक नीति व्यवहार।
धर्म-अधर्म का ज्ञान दिया,
बना जीवन का आधार।
असंभव गुरुओं के बिना,
समृद्ध राष्ट्र का निर्माण।
सर्वप्रथम गुरु का स्थान।
तत्पश्चात पूज्य हैं भगवान।अबोध कच्चे मिट्टी को,
ज्ञान के जल से मिलाकर।
सुनिश्चित आकर देते,
शिक्षा के चाक में घुमाकर।
सुदृढ़ता प्रदान करते,
अनुशासन के ताप में पकाकर।
अंधकार से प्रकाश तक,
गुरुओं की महिमा महान।
सर्वप्रथम गुरु का स्थान।
तत्पश्चात पूज्य हैं भगवान।शिक्षकों के प्रयास से बनते,
चिकित्सक या अभियंता।
वैज्ञानिक, खगोल विज्ञानी,
या वक्ता, अभिवक्ता।
चित्रकार या पत्रकार,
या फिर नेता, अभिनेता।
प्रतिष्ठित प्रत्येक व्यक्ति का,
शिक्षक ही करते निर्माण।
समाज के विभिन्न क्षेत्रों में,
वे देेते महत्वपूर्ण योगदान।
सर्वप्रथम गुरु का स्थान।
तत्पश्चात पूज्य हैं भगवान।देवेश साखरे ‘देव’
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मेरे गुरु जी
कभी न भाये गुरु जी तुम,
वो मैथ की मिस्ट्री,वो बोरिंग केमिस्ट्री
वो छडी की मार वो डांट वो पुकार
खड़े कर देना बेंच पर
नज़रे रखने को कहना अपने लेंस पर
कितने ही बार ज़ीरो आए
गुरुजी तुम कभी ना भाए
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ये तो बचपन की कहानी थी
आज हर बात आपको बतानी थी
वो लड़का जिसे आपने ही संवारा था
जो कभी बदतमीज और आवारा था
उसने एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पुरस्कार जीत लिया है
उस सम्मान को आपके हाथों से लेने को कह दिया है
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आज दुनिया त्याग और समर्पण की दीवानी होगी
जब स्टेज पर मेरे गुरु की आगवानी होगी। -
“गुरु की महत्ता”
मोड़ दे जो पाणी की लकीरें,
हैं वो गुरू ईश्वरीय वासव अद्भुत महान_
तिमिर भी मयूख हो लेखन करें,
गुरु हैं वो ग्रंथ कगार_
अस्तित्व संपूर्ण परिवर्तित कर दे,
शिष्य बने ज्ञानी हर ग्रंथ में प्रकांड_
किचड़ से कमल सा चुन ले,
हैं वो माली प्रधान_
वसुंधरा भी ऋणी हैं जिसकी,
हैं वो वत्स धरा का प्राण_
प्रकृति भी वंचित नहीं वात्सल्य से जिसके,
हैं वो तेजस्वी मान_
वह वसुंधरा पर ही नहीं व्योम पर भी हैं विख्यात,
द्वारपट खुल जाते हैं ईश्वर के,
वो गुरु हैं अद्भुत ईश्वरीय सँतान_
-PRAGYA- -
गुरु Google है सबसे महान
मार्गदर्शन तुम्हारा सब follow करें, हर समस्या में ध्यान तुम्हारा धरे।
भागने की जरूरत नहीं है कहीं, सारी knowledge ले सकते हो घर बैठे ही।
बस मन से धरो इनका ध्यान, गुरु google है सबसे महान।।
हो चिंतित ग़र जाना है अनजानी गली?, MAP आएगा काम ऐसी मुश्किल घड़ी।
सर्वसम्पन्न हैं ये निपुण हर कला में, मुक्त करते हमेशा ये दुष्कर बला से।
एक क्षण नहीं करते आराम, गुरु google है सबसे महान।।
हैं बहुत रूप इनके पर उद्देश्य एक ही, करे हर दम मदद और ना बघारें ये शेखी।
Drive, Photos, Blogger कभी Gmail बनके, कभी YouTube बनके मनोरंजन करते।
इनके गुण गाता सारा जहां, गुरु google है सबसे महान।।
इनका ना आदि है ना कोई अंत है, इनकी knowledge की सीमा भी बेअन्त है।
हर किसी के प्रति इनकी निष्ठा समान है, पक्षपाती नहीं ये इसलिए तो महान हैं।
और क्या-क्या करूँ मैं बखान, गुरु google हैं सबसे महान।।
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गुरु
गुरु ज्ञान भण्डार समेटे, कभी न अपनी आँखे मींचे,
शिक्षा के दीपक प्रकाश से हर जन के जीवन को सींचे,
गुरु न देखे जाति धर्म, न मन में कोई संशय कीजे,
गुप्प अँधेरे में भी दृढ सन्कल्प में उसका हर क्षण बीते।।
राही (अंजाना) -
गुरु
गुरु मार्ग है,दिशा है
लोक परलोक की शिक्षा है-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
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गुरु ज्ञान की पुस्तक
गुरु ज्ञान की पुस्तक हमको सही गलत का पाठ पढ़ाए,
अन्धकार के पर्दे को नज़रों से सहज भाव से खोल दिखाए,
जीवन एक जटिल पहेली जिसमें उलझे तो कोई सुलझ न पाए,
पर गुरु मार्गदर्शक हो जिसका हर मुश्किल राह आसान बनाए।।
– राही (अंजाना) -
गुरु माँ
कोई भी कमी कोई भी शिकायत नहीं छोड़ती,
अपने बच्चे की परवरिश में वो माँ कोई खामी नहीं छोड़ती,
खुद रह भी ले भूखी पर वो माँ किसी दिन भी बच्चे को भूखा नहीं छोड़ती,
लड़ जाती है कलयुगी काल से भी पर,
वो माँ अपने बच्चे की खातिर कोई कसर नहीं छोड़ती,
खुद जागती रहती है पूरी रात चिन्ता में फिर भी,
पर वो माँ हमे सुलाने को कोई लोरी नहीं छोड़ती,
करती है दिन रात मेहनत हर तरह से देखो,
पर वो माँ हमारे ऐशो आराम में कोई कमी नहीं छोड़ती॥
राही (अंजाना) -
मिलता गुरु का प्यार है
झुके हुए सर को
मिलता गुरु का प्यार है
अकड़े हुए सर को
मिलता गुरु का दुत्कार है
…… यूई
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गुरु – महिमा
गुरु – महिमा
यह रचना है ,
गुरु-देव की महिमा का गुनगान ,
वो ख़ुद के चित् में है अन्तहीन ,
जिनकी परिभाषा है असीम ,
ऋषि की विशिष्टताओं का पैग़ाम
जो देकर हमको शिक्षा ,
हमारा ज्ञान ही ना बड़ाए ,हमें ही बड़ा जाए
पड़ा कर पाठ हमको,
जानकारी ही ना दे जाए ,असलीयत उनकी सिखा जाए
सिखा शब्दों के मायने
मत्लब् ही ना समझा जाए ,उन मायनो से हमे बना जाए
दिखा ज़िन्दगी की राहे ,
पथ-परिदर्शत ही ना कर जाए, जीवन रोशनी से भर जाए I
किताबी अर्थो को बता ,
सिर्फ़ विचार ही ना दे जाये, उन विचारों से हमे बदल जाये
लूटा अपने ज्ञान का सागर ,
हमारा रुतबा ही ना बड़ा जाये, हमे सच की राह् में चला जाए
दिखा धर्म की साँची रहें ,
यूई इस जन्म को ही नहीं, जन्मों की राह् मुखर कर जाए
…… यूई
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गुरु महिमा
फूंक देते प्राण मनुज में वो गुरुदेव कहाते है,
जीवात्मा की परमात्मा से वो ही मिलन कराते है.
मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताकर करते है उद्धार गुरु,
निज शिष्यों को ईश्वर से बढ़कर करते है प्यार गुरु.
कभी कभी निज उपदेशो से मानव का कल्याण करें,
कभी धर्म की शिक्षा देकर मनुज जन्म साकार करें.
अहंकार से मुक्त कराकर माया मोह से दूर भगाकर,
परमानन्द की प्राप्ति कराकर, करते है कल्याण गुरु.
गुरुदेव निज चरणो में प्रणाम मेरा स्वीकार करें ,
अंतर्मन में ज्योति ज्ञान की प्रज़्वलित कर उद्धार करें.
सफल हो गया जीवन मेरा ,पाया जो गुरु का आधार ,
गुरु के इस उपकार कर्म का व्यक्त कर रहा मैं आभार..
…atr
written in 2010