गुलाब मत देना

तुम अपने मुहब्बत का
हिसाब मत देना।
अबकी वेलेंटाइन पे यारा
गुलाब मत देना।।
फूल तो देना मगर काँटों का
घाव मत देना।
खुली आँखों में अधूरा कोई
ख्वाब मत देना।।

Comments

2 responses to “गुलाब मत देना”

  1. वाह वाह, बहुत खूब शास्त्री जी

  2. Geeta kumari

    सुन्दर भाव

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