गुस्ताखियाँ

यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं,
पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं|
पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती,
ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून ढूँढ लिया करते हैं|

Comments

3 responses to “गुस्ताखियाँ”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

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