यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं,
पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं|
पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती,
ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून ढूँढ लिया करते हैं|
गुस्ताखियाँ
Comments
3 responses to “गुस्ताखियाँ”
-

nice poem bhoomi
-
thank u ma’am
-
-

वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.