गोधूलि

फिर वही ढलती गोधूलि मन में एक एहसास जगा दिया।
नादान था दिल, बिना सोचे दिल दग़ाबाज़ को दे दिया।।

Comments

4 responses to “गोधूलि”

  1. अति सुन्दर रचना

Leave a Reply

New Report

Close