बेटी होना एक अभिषाप !
मानता है यह आज भी समाज
बेटी तो कुल की लक्ष्मी है
पूजी जाती हर घर में है
बेटी से घर में हो उजियारा
किलकारी से खिलता
आंगन सारा
बेटी करती है सबका सम्मान
परिवार में बसते उसके प्राण
जब जाती है वह ससुराल को अपनी
दुनिया बसाती वहाँ पे अपनी
बेटी तो है दो कुल का सम्मान
बेटी है घर, परिवार का मान…
घर की लक्ष्मी बेटियां
Comments
8 responses to “घर की लक्ष्मी बेटियां”
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बेटियों पर बहुत सुंदर रचना
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धन्यवाद
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“बेटियाँ घर का चिराग होती है ” आपने बहुत ही अच्छा लिखा है
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सराहना हेतु बहुत आभार
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बहुत खूब, लाजवाब रचना
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धन्यवाद
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अतिसुंदर भाव
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धन्यवाद
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