चलती साँसों में बसा आज हो तुम

बीते कल की नहीं कहानी तुम
चलती साँसों में बसा आज हो तुम
प्यार की, दिल्लगी की बात नहीं
इससे बढ़कर रहे हो नाज हो तुम।
अहमियत क्या बताएँ, कैसी है
तन में धड़कन है जैसी वैसी है,
यह युमन है कि तुम हमारे हो
खूब प्यारे हो, बहुत प्यारे हो।
रोशनी हो, उमंग हो तुम ही
खिलते जीवन के रंग हो तुम ही
हम हैं कल्पक व तुम प्रेरक हो,
जिन्दगी की तरी के खेवक हो।
आओ बस बैठे रहो पास में तुम
जिन्दगी रसमयी बनायें हम।

Comments

10 responses to “चलती साँसों में बसा आज हो तुम”

  1. बहुत ही शानदार रचना, प्रेम रस परिपूर्ण

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह वाह बहुत सुंदर

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      Thanks

  3. Geeta kumari

    जीवन साथी पर लिखी गई बहुत ही सुन्दर रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  4. प्रेम के भावों से लबरेज पत्नी के लिए सुंदर कविता

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

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