छांव

हर तरुवर दे केवल फल,
यह ज़रूरी नहीं ज़िन्दगी में
किसी वृक्ष की छाया भी,
सुकून बहुत देती ज़िन्दगी में
जिसने झेली हो तपिश ज़िन्दगी की,
वही सुकूं का सुख जानते हैं
जिनकी फल पर ही रहती निगाहें,
छांव के मायने नहीं मानते हैं ।।

_______✍️गीता

Comments

6 responses to “छांव”

  1. सच्ची बात, उत्तम बात

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी, आभार🙏

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद प्रज्ञा जी

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