उलाहना के भाव पढ़ लो ना
घट रही दूरियां बढ़ा लो ना,
हाँ कहो ना कहो जरा बोलो
उठ रहा दिल में जो बता दो ना।
बेवजह इस तरह से दिल में
आ रहे बोल को छुपाओ ना
नफ़रतें हैं तो उनको आने दो
मन के बक्से में यूँ छुपाओ ना।
अब भी नजरें हमारी ओर घुमा
बैर में चाहतें बुलाओ ना,
तीर-तरकश से अंग शोभित कर,
इस कदर आज तुम लुभाओ ना।
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