आज एक टूटी हुई
चप्पल मिली उसे
कूड़े के ढेर में,
साथ ही एक पुरानी
बनियान मिली।
दो रुपये का सिक्का
रख गई हाथ में,
सड़क पर चलते
एक धनवान मिली।
खुशी का ठिकाना
नहीं रहा जब उसे
कूड़े के ढेर में
छोटी-छोटी खुशियों की
खान मिली।
छोटी-छोटी खुशियों की
Comments
5 responses to “छोटी-छोटी खुशियों की”
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बड़ा ही मार्मिक चित्रण
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वास्तव में अत्यंत मार्मिक पंक्तियाँ
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वाह सर, सर्वश्रेष्ठ कवि सम्मान की बहुत बहुत बधाई है।
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निर्धन व्यक्ति की खुशियों को दर्शाती हुई बहुत ही मार्मिक रचना
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सर्वश्रेष्ठ कवि बनने पर आपको बधाई हो
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