जटायु अंत में आंखें खोल
हाथ जोड़ के करे वंदना रोता रोता बोली
जटायु अपनी आंखें खोली
जली जो पीले तो वह नहीं पीता राम बचा लो दुखी है सीता
भक्ति रस में डुबके देखो देखो अशू नयन बोले
जटायु अंत में आंखें खोली
खेल रहा जो मौत से क्रीड़ा देखी ना जाती उसकी पीड़ा हरि की गोद में पड़ा हुआ वो माटी का तन डोले
जटायु अंत में आंखें खोलो
चलते समय हरी पास मेरे
जटायु अंत में आंखें खोले
Comments
2 responses to “जटायु अंत में आंखें खोले”
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वाह
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Thankyou
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