जनवरी की ठंड है
पर ढल रही सी ठंड है
कम हुआ है कोहरा
लेकिन अभी भी ठंड है।
बढ़ रहे हैं दिन
घट रही हैं रात
कटकटाना कम हुए हैं
ठंड से अब दांत।
सूर्य की किरणें में
अब बढ़ने लगा है ताप,
थम गई है निकलती
साँस से अब भाप।
जनवरी की ठंड है
Comments
4 responses to “जनवरी की ठंड है”
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बहुत खूब
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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कवियित्री चंद्रा जी की सर्दियों पर बहुत सुंदर कविता
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अतिसुंदर भाव
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