Chandra Pandey's Posts

जय हिंद

मुल्क है हम हैं, समझ जा जमाने तू, देश माँ है, तू बेटा है, जुट रिश्ता निभाने तू। किसी भी हाल में भारत को हमने सींच देना है, जय हिंद का जेहन में सबके गीत देना है। »

जनवरी की ठंड है

जनवरी की ठंड है पर ढल रही सी ठंड है कम हुआ है कोहरा लेकिन अभी भी ठंड है। बढ़ रहे हैं दिन घट रही हैं रात कटकटाना कम हुए हैं ठंड से अब दांत। सूर्य की किरणें में अब बढ़ने लगा है ताप, थम गई है निकलती साँस से अब भाप। »

अरी वो धूप

अरी वो धूप तुम क्यों डर गई ठंडक से चीर कर आ जाओ हमें तपा जाओ, जीने की राह दिखा जाओ कुहरे को दूर कर आ जाओ। »

चाँद

रात की ठंड में चाँद कैसे चल रहा है, चाँद तो चाँद है सितारों का यूँ टिमटिमाना ठिठुरना लग रहा है। ओढ़कर कर चादर नीली आसमां की सफर यह चल रहा है। »

दर्द

जीवन जुड़ा दर्द लिखना जीवन से जुड़ा दर्द पढ़ना मेरी आदत में शामिल है सच कहना, सच को ही सुनना। कवि कुछ सच्ची कविता कह दो जिसमें जीवन की पीड़ा उभरे वो घाव भरने ही होंगे चाहे वो हों कितने गहरे। »