जब भी बादलों से उतर के आती है बारिश

जब भी बादलों से उतर के आती है बारिश,

ज़मी को खुल के गले से लगाती है बारिश,

भिगा देती है तन संग मन के मेरे आँगन को,

जब सब कुछ मुझको खुल के बता देती है बारिश,

दोस्ती है गहरी किससे कितनी पुरानी,

दिखता है हवाओं से जब हाथ मिला लेती है बारिश।।

– राही (अंजाना)

Comments

8 responses to “जब भी बादलों से उतर के आती है बारिश”

  1. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    awesome bhai

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