जब से से देखा है उन्हें
देखते रह गए हम,
उनकी सूरत को नहीं
उनके व्यवहार हो हम।
वो सुलझी हुई बोली,
हँसी का फुहार न्यारा सा
शुद्धता आचरण की
मिजाज प्यारा सा।
जब से से देखा है उन्हें
Comments
15 responses to “जब से से देखा है उन्हें”
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Very Nice
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Thanks
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वाह, बहुत ही सुन्दर कविता है। लेखनी से स्नेह और सम्मान छलक रहा है। लेखनी के निखार का परिचायक।
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सादर अभिवादन, इस सुन्दर टिप्पणी हेतु आभार।
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Welcome ji 🙏
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सुन्दर
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धन्यवाद सर
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Very nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Sunder
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सादर धन्यवाद जी
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Nice poem
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Thanks
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