श्री राम का जहां जन्म हुआ
मंदिर वहीं बनाएंगे।
दुश्मनों के सीने पर हम
ध्वज भगवा फहराएंगे।।
बचपन बीता जहां आराध्य का
वहीं पूजन उनका कराएंगे।
मान रखा जहां पिता वचन का
मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा वहीं कराएंगे।।
बाबर फिर कोई नजर उठाए
तो सर वहीं गिराएंगे।
प्रभु की सेवा को फिर
भक्त श्री राम के आएंगे।।
सूर्य भी रुककर देखेगा
भव्य दृश्य मंदिर निर्माण का।
धन्य हो प्रभु दर्शन से
फूल देवगण बरसाएंगे।।
जन्म हुआ जहां श्री राम का
मंदिर वहीं बनाएंगे।।
जय श्री राम
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