श्यामल रूप है

श्यामल रूप है,नंद को लाल है।

मोर मुकुट संग, पायल झंकायो है।

नटखट अठखेलियों से, गोपियाँ रिझायो है।

माखन खायो है, रास रचायो है।

यमुना नदी किनारे, बंसी बजायो है।

मटकियाँ फोड़त है, गौये चरायो है।

घर – घर जाए के, माखन चुरायो है।

मैया के डाँटन पर, झूठ खूब बोलयो है।

मीठी – मीठी बातों में, सबको फँसायो है।

मिट्टी जब खाये तो, ब्रह्मांड दिखायो है।

पालना में झूलकर, राक्षस भगायो है।

मैया के बाँधन पर, रो कर दिखायो है।

संकट जब आयो है, गोबर्धन उठायो है।

गोकुल का श्याम ये, मथुरा से आयो है।

बाल्य अवस्था में, खूब खेल दिखायो है।

मित्रों के संग-संग, वस्त्र भी चुरायो है।

मुरली की तान से, राधा बुलायो है।

नटखट शैतानियों से, मन को लुभायो है।

Comments

11 responses to “श्यामल रूप है”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Nice poetry on my Kanahaiyaji

  2. Neha Avatar
    Neha

    आपका सहृदय आभार सर जी🙏

    1. Neha Avatar
      Neha

      Thanku ma’am

    1. Neha Avatar
      Neha

      Thanku Ma’am

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    श्री कृष्ण जी की बाल लीलाओं को प्रकट करने का बहुत ही सफल प्रयास, बेहतरीन
    मगर प्रतियोगिता के अनुसार चित्र से संबंधित थोड़ा सा और लिखना चाहिए था!

    1. Neha Avatar

      Thanku sir. Next time I ll try.🙏

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