जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद
जय भारत, जय भारत,
जय भारत, जय भारत,
जय हिंद, जय हिंद।
हम सबको मिलकर इसकी
उन्नति में जुट जाना है,
सब तरफ रहे खुशहाली,
हरियाली को पाना है।
सब ओर कुसुम खिल जायें
जन-जन के दिल मिल जायें,
गुंथ एक सूत्र में माला
भारत को मुस्काना है।
गणतंत्र का उजियारा
रोशन कर दे दुनिया को,
जन-जन हो जाये तत्पर
खुद की किस्मत लिखने को।
राजा खुद ही प्रजा खुद
सब राजा सब प्रजा हों
गणतंत्र खूब फले अब
सब बराबरी दर्जा हों।
कमियां सब दूर किए जा
उन्नति भरपूर किये जा,
जय हिन्द का कहकर नारा
भारत में नूर भरे जा।
आओ मिलजुल कर गायें
जय भारत के गीतों को,
जय हिंद, जय हिंद
जय हिंद के संगीतों को।
जय हिंद, जय हिंद
Comments
3 responses to “जय हिंद, जय हिंद”
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जय हिन्द, गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं🇮🇳
कवि सतीश जी द्वारा प्रस्तुत देश प्रेम की बहुत ही सुंदर कविता -

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अतिसुंदर रचना
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