जागीर

ऐ ज़िन्दगी किसी की जागीर नहीं
आज़ाद परिंदा रूह सबकी

रूह तक पहुंचा जो,
दुनिया में आबाद रहा

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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