16 Comments

  1. बहुत ही मार्मिक भाव….
    “जाने कहां चले जाते हैं,सांस उखड़ी धड़कन रुकी
    उड़ जाते हैं पाखेरू,फिर जाने कहां चले जाते हैं”
    किसी अपने के दुनियां से जाने के गम की बहुत सलीके से अभिव्यक्ति की है। लेखनी की विलक्षण प्रतिभा को प्रणाम ।

    1. आपके द्वारा की गई इस बेहतरीन समीक्षा हेतु सादर आभार व्यक्त करता हूँ। आपकी लेखनी की यह विलक्षणता बनी रहे। सादर अभिवादन।

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