जाने किन बातों में
उलझा रहता है यह मन
तपती धूप में रहता है
फिर भी ठंडक सी देता है
मेरे विचारों को एक चिंगारी देता है
नदियों में बहता रहता है
हवा में सैर भी करता है
मेरे कोमल भावों में खुद को
खोया रखता है
जाने किन बातों में
उलझा रहता है यह मन !!
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