✍?(अंदाज)?✍
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जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए
जिंदगी मे सुसंस्कार जिंदा रखिए
रूठना मनाना क्रम है जीवन का
रूठकर भी नेह धार जिंदा रखिए
सच्चे प्रेम की परिभाषा यही है
नेह का श्रद्धा आपार जिंदा रखिए
बुराईया कटुता है मन का कचरा
मंशा मे शुद्धता सार जिंदा रखिए
सबको मिले संसार की हर खुशी
ऐसा सात्विक विचार जिंदा रखिए
खुद से मिले इंसान को प्रसन्नता
धारणा ऐसी बेशुमार जिंदा रखिए
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श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
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( दिनांक-09-04-2018)
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