जिसे भी देखा दौड़ता मिला

डगर पर जो भी मिला
वह दौड़ता भागता मिला
ज़िंदगी जिसकी भी मिली
उससे पुराना वास्ता मिला
जब भी शाम होते घर गया
दर्देदिल ही जागता मिला|
बीते साल की तरह फिर
नए साल का सुबह मिला
सर पर यूं चढ़ सा बोला
ज़िंदगी में डांटता मिला |
मुक्तक -व्यवस्था और जन- जन जब जागेगा
वर्षों की जमी मैल सब भी काटेगा |
-सुखमंगल सिंह ,अवध निवासी

Comments

13 responses to “जिसे भी देखा दौड़ता मिला”

    1. Sukhmangal Avatar

      हार्दिक स्वागत ,आदरणीय महेश गुप्ता जौनपुरीजी

    1. Sukhmangal Avatar

      हार्दिक आभार nitu kandera जी

  1. सुन्दर रचना

    1. Sukhmangal Avatar

      रचनाकार के मनोबल बढ़ाने में मदद कीं ,हार्दिक आभार Kanchan Dwivediजी आभार

    1. Sukhmangal Avatar

      हार्दिक अभिनंदन आभार आदरणीय राही अंजाना जी

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