Sukhmangal, Author at Saavan's Posts

“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994”

“काशी से कश्मीर तक सद्भावना यात्रा सन1994” किसी भी यात्रा का उद्देश्य सिर्फ मौजमस्ती व् पिकनिक मनाना ही नहीं होता | यात्राएं इसलिए की जाती हैं कि हम एक-दुसरे की सभ्यता ,संस्कृति,रहन सहन व् विचारों को जान सकें ,करीब से देख   अच्छाई ग्रहण  सकें तथा अपनी संस्कृति सभ्यता से प्रभावित कर सकें | अखिल – भारतीय सद्भावना संगठन द्वारा आयोजित गाठ छ: अगस्त से बाइस अगस्त तक ‘काशी से कश्म... »

कवि का ‘सरयू से ‘ गुजरना – सुरेंद्र वाजपेयी

कवि का ‘सरयू से ‘ गुजरना – सुरेंद्र वाजपेयी ———————————————— सुहृदयी कवि ,लेखक एवं सामाजिककार्यकर्ता श्री सुखमंगल सिंह कृत्य ‘कवि हूँ मैं सरयू तट का ‘ एक भावनात्मक काव्य संग्रह है | इसमें सरयू महिमा के साथ- साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम की जन्मस्थली उनकी प्रिय नगरी ... »

जिसे भी देखा दौड़ता मिला

डगर पर जो भी मिला वह दौड़ता भागता मिला ज़िंदगी जिसकी भी मिली उससे पुराना वास्ता मिला जब भी शाम होते घर गया दर्देदिल ही जागता मिला| बीते साल की तरह फिर नए साल का सुबह मिला सर पर यूं चढ़ सा बोला ज़िंदगी में डांटता मिला | मुक्तक -व्यवस्था और जन- जन जब जागेगा वर्षों की जमी मैल सब भी काटेगा | -सुखमंगल सिंह ,अवध निवासी »

पढ़ो – पढ़ाओ सबको सुनाओ

तुम्हें आज मैं कथा – सार यहाँ सुनाने आया हूँ तुमको शुकदेव –परीक्षित का संवाद बताने आया हूँ इंद्रिय शक्ति अगर चाहो तो इन्द्र पूजन करो ब्रह्म – तेज की चाह अगर हो वृहस्पति- कृपा भरो चाह श्री लक्ष्मी को खुश करना देवी माया का जप करना तेज की हो चाह यदि तुममें अग्नि प्रज्जवलित करके पूजना – तुम्हें यदि वीर है बनना रुद्रों को खुश करते जाओ धन पाने की हो मन में लालसा वसुओं के आराधक बन जाओ अन्न कृ... »

“कवि हूँ मैं सरयू तट का “

“कवि हूँ मैं सरयू तट का ” कवि हूँ मैं सरयू तट का समय चक्र के उलट पलट का मानव मर्यादा की खातिर सिर्फ अयोध्या खड़ी हुई क्यों कि युगों से मेरी अयोध्या जाने हाल हर घट पनघट का समय चक्र के उलट पलट का कवि हूँ मैं सरयू तट का श्री विष्णु का हुआ प्रादुर्भाव पृथु – समक्ष विष्णु ने रखा प्रस्ताव इन्द्र को क्षमा करो महाराज निन्यानबे यज्ञों के विध्वंसवान क्षमा चाहते हैं देवराज | अपराध क्षमा हो उ... »

“सहपाठी मिले “

फिर वही संगी हमारा फिर वही साथी मिले हो जनम यदि पुनः तो, मुझे फिर वही सहपाठी मिले | लड़ता ही रहता है वह हर समय हर मोड़ पर संघर्ष में संग रहता सदर ,जाता न मुझको छोड़ कर | हिम्मत -हौसले में है ,उसका तो शानी नहीं एक सच्चा मित्र है वह ,चलता सबको जोड़कर | उसका संग वैसे ही जैसे ,बृद्ध बृद्ध को लाठी मिले हो जनम यदि पुनः ,तो मुझे फिर वही सहपाठी मिले || एक रिस्ता है जुड़ा वर्षों पुरानी दोस्ती का, जिंदगी का एक र... »

अभियान नवगीत “

अभियान नवगीत ” ———————— बांधे सर पे मस्त पगड़िया राह कठिन हो,चलना साथी दुराचार ख़तम करने अब उतार चलो काँधे की गाँती आन ,बान और शान हमारे अच्छे- सच्चे हैं वनवासी दिलों – दिलों को दर्द बताने महफिल – महफिल खड़ी उदासी आँखें भर – भर उठती हैं मां जब अपनी कहर सुनाती बांधे सर पे ……………. जोते – बोये ,कोड़... »

रिश्तों का सम्मान

भांप गया सत्य बात ,जो मानता नहीं सच कहे ‘मंगल ‘देश में,दुश्मन बड़ा वही ! भूख – प्यास जकड़न भल ,भरमता कहा सही पूजी मिली प्यार की ,ठुकराता चला कहीं | सम्मान रिश्तों का नहीं ,उड़ान आकाशे बही पास फेसबुक साथ लिए ,हताश जिंदगी रही ! मंगल रिश्तों का सम्मान ,निभाया जिसने नहीं रचनात्मकता फीकी पड़ी,वह टिकता नहीं कही|| -SUKHMANGAL SINGH “ »

नव वर्ष

“नव वर्ष की शुभकामनाएं ” ————————— नव वर्ष की शुभकामनाएं / बच्चों में उत्साह जगाएं | प्रांगन मंदिर संस्कृति अपनाएँ / देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ || भगवा ध्वज की पताकायें | तिलक चन्दन टीका लगाएं ? नव वर्ष धूम से मनाएं | देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ || शंख ध्वनि मृदंग बजाएं / पुरुषोत्तम राम को याद दिलायें | विक्रमादित्य का विक्रमी मनाएं / ... »

“चिड़िया”

“चिड़िया” चीं चीं करती चिड़िया आती अम्बर ऊपर घोसला बनातीं | पानी जहां पर वहाँ मडरातीं औ जमी से उड़ -उड़ जाती | »

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