2 Comments

  1. ऐसे ही नहीं योगी,
    धरा पे स्वछंद विचरते है.
    जप-तप उनका भोजन है,
    हरि-नाम उनका जीवन है ।।3।।
    __________ योगी जीवन के बारे में जानकारी देते हुए और सत् मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हुई कवि विकास जी की बहुत श्रेष्ठ रचना जय श्री राम

Leave a Reply