जीना जरूरी है

जय श्री सीताराम
————————
जीना जरूरी है,
मरना कायरों का काम है .
प्रण का टूटना स्वाभाविक है,
फिर भी उठना वीरों का काम है .।।1।।
————————————————-
आलस मन और सुस्त तन उसका है,
जिसने खूद पे वार किया, संहार किया.
मगर समझा न खूद को,
उसका समस्त जीवन बेकार है ।।2।।
———————————————
ऐसे ही नहीं योगी,
धरा पे स्वछंद विचरते है.
जप-तप उनका भोजन है,
हरि-नाम उनका जीवन है ।।3।।
————————————-
लूटा दो जिन्दगी नर सत्-पथ पे,
कुमार्ग पे क्या रखा है ?
चहूँ और अँधियारा है,
प्रकाश तो केवल खूद में है ।।4।।
(प्रकाश तो स्वयं की वस्तु है ।।)
—————————————
हाँ प्रकाश तो केवल खूद में है,
प्रकाश ही संकल्प कराता है,
नर को संकल्प की डोर में बँधना है,
और मानव-जीवन सरल बनाना है ।।5।।
जय श्री सीताराम

Comments

2 responses to “जीना जरूरी है”

  1. Geeta kumari

    ऐसे ही नहीं योगी,
    धरा पे स्वछंद विचरते है.
    जप-तप उनका भोजन है,
    हरि-नाम उनका जीवन है ।।3।।
    __________ योगी जीवन के बारे में जानकारी देते हुए और सत् मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हुई कवि विकास जी की बहुत श्रेष्ठ रचना जय श्री राम

Leave a Reply

New Report

Close