जीवन की पुस्तक

मेरे जीवन की पुस्तक को है पढ़ पाना बड़ा मुश्किल ,
कि इसमें दुःख है पीड़ा है सुख पाना बड़ा मुश्किल .
ये पुस्तक आज भी यूँ मीर स्वर्णिम ही रही होती ,
तुझे पाना बड़ा मुश्किल तुझे खोना बड़ा मुश्किल…

…atr

Comments

2 responses to “जीवन की पुस्तक”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Satish Pandey

    Bahut khoob

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