जीवन रेखा

जीवन की रेखा
बहुत लम्बी देखकर
मेरी आँखों में
आँसू आ गये
आखिर अभी और कितनी
तकलीफें झेलनी हैं मुझे !
कब तलक दर-दर की ठोकरें खानी हैं
कब तलक आँसू यूं ही बहाने हैं
यही सोंचकर रो पड़ी मैं
उदास हो गई
अपने हाथों में जीवन रेखा लम्बी देखकर…!!

Comments

4 responses to “जीवन रेखा”

  1. Harish Joshi U.K

    nice

  2. Geeta kumari

    हृदय स्पर्शी रचना

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

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