जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं
उत्सव का माहौल हवा में भर जाता है
इतने ध्यान से तैयार किया गया कागज
धागे के साथ पतंग बन उड़ जाता है

ये कागज की पतंगें बहुत आनंद देती हैं
नीले पैमाने पर, एकमात्र खिलौना
ये सबको मंत्रमुग्ध कर देती हैं|

हज़ारो पतंगे आसमान को भर देती हैं
कीमती हीरो की तरह कई आकारो में
सभी आँखें को आकाश की ओर मोड़ देती हैं

युद्ध की शुरुआत पतंगों के टकराने से होती है
पतंग काटने के लिए हम गुटों में बंट जाते है
नियमों को हम सभी का पालन करते हैं
मगर फिर भी आसमान नहीं बँटता!

Comments

4 responses to “जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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