जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है।

जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है।
जिंदगी का मज़ा अब सवालों में है।।
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जो जाता है उसको चले जानें दो।
देख लेंगे हम ग़म के जो प्यालों में है।।
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तस्वीरों को तेरी मैं अब रखता नहीं।
बस तेरा चेहरा अंधेरे उजालों में है।।
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आँखों में मेरी है मंजिल ही मंजिल।
फिर दर्द थोड़े न पैरो के छालों में है।।
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मौसमो की तरह था जो बदलता रहा।
चर्चा उसी की वफ़ा के मिसालों में है।।
@@@@RK@@@@

Comments

9 responses to “जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है।”

  1. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    DIL KO CHHU GYI GHAZAL

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      धन्यवाद हौसला बढ़ाने के लिए

  2. Mithilesh Rai Avatar

    बहुत खूब बेहतरीन सृजन

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

  3. Anil Goyal Avatar
    Anil Goyal

    वाह

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      शुक्रिया

  4. राम नरेशपुरवाला

    Good

  5. Abhishek kumar

    Nice

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