तेरी खिड़की से झांकते बादल,
तेरे हाथों में चलती कलम ।
बड़ी ही अद्भुत लगती हमें,
कुछ लिखते ही रहते हो हरदम ।
झांकते बादल
Comments
18 responses to “झांकते बादल”
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बहुत सुन्दर, उत्तम
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बहुत बहुत शुक्रिया इंदु जी
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जबरदस्त पोयम
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बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार कमला जी 🙏
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Very nice
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Thank you very much 🙏 Isha ji
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तेरे हाथों में चलती कलम ,
वाह वाह, काबिलेतारीफ है, keep it up, वाह, रुकना नहीं है, कलम ने चलते जाना है।-
जी, इस हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया 🙏🙏
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सुन्दर पंक्तियां
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏
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वाह वाह
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Thanks for your pricious complement Piyush ji 🙏
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Nice very nice
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Thank you ji Thank you 🙏
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