झांकते बादल

तेरी खिड़की से झांकते बादल,
तेरे हाथों में चलती कलम ।
बड़ी ही अद्भुत लगती हमें,
कुछ लिखते ही रहते हो हरदम ।

Comments

18 responses to “झांकते बादल”

  1. बहुत सुन्दर, उत्तम

    1. बहुत बहुत शुक्रिया इंदु जी

  2. जबरदस्त पोयम

    1. बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार कमला जी 🙏

    1. Thank you very much 🙏 Isha ji

  3. तेरे हाथों में चलती कलम ,
    वाह वाह, काबिलेतारीफ है, keep it up, वाह, रुकना नहीं है, कलम ने चलते जाना है।

    1. जी, इस हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया 🙏🙏

  4. सुन्दर पंक्तियां

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  5. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

  6. Piyush Joshi

    वाह वाह

    1. Geeta kumari

      Thanks for your pricious complement Piyush ji 🙏

  7. Chandra Pandey

    Nice very nice

    1. Geeta kumari

      Thank you ji Thank you 🙏

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