अभिनय की इस परंपरा को
मैंने अब तक खूब निभाया
दिल के आंसू छुपा लिया और
झूठी मुस्कान से सब को रिझाया
बात बना ली, जख्म छुपाए
रात-रात भर नींद ना आए
चंदा से आंख मिचोली करके
खेल-खेल में उसे हराया।।
“झूठी मुस्कान”

Comments
2 responses to ““झूठी मुस्कान””
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Nice
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Thanks
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