ठहरी हुई वो शाम

ठहरी हुई वो शाम ,
हाथों पे स्याही से लिखा
वो नाम

चलती हुई सी वो सड़क
साथ चलना बस यूँ ही
हाथ उनका थाम

मुस्कुराहटों में उनकी
ढूंढना खुशियाँ दबी
देखना कनखी से उनको
और नजरे भर कभी

धीरे धीरे पग बढाना
रास्ता लम्बा चले
आँखों में भरने को उनको
और ज्यादा शब मिले

माँगना कुछ और घंटे
माँगना मंदिर के आगे
लम्बी कर दे शाम

चलती हुई सी वो सड़क
साथ चलना बस यूँ ही
हाथ उनका थाम

Comments

3 responses to “ठहरी हुई वो शाम”

  1. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    चलती हुई सी वो सड़क…nice imagination brother

  2. Panna Avatar

    bahut khoob 🙂

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