ठीक तेरे जैसा ही हूँ

ये न समझ कि
रोड़ी फोड़ कर गुजारा करता हूँ तो
ऐसा-वैसा ही हूँ ,
मैं भी इंसान हूँ,
भीतर-बाहर
ठीक तेरे जैसा ही हूँ।

Comments

10 responses to “ठीक तेरे जैसा ही हूँ”

    1. सादर अभिवादन

    1. धन्यवाद जी, आभार

  1. ग़रीब मजदूरों का दर्द बयां करती मार्मिक रचना।

    1. सुन्दर समीक्षा हेतु सादर धन्यवाद, नमस्कार

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Thanks ji

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