4 Comments

  1. बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया है आपने
    “शक्ति को पूरी खपाकर
    मंजिलें देता पथिक को,
    सब यही कहते हैं कम कर
    कोई नहीं देता अधिक तो।”
    बहुत ही सुंदर और विचारणीय पंक्ति है पाण्डेयजी। अतिसुंदर भाव पूर्ण रचना।

  2. “आ बैठ जा
    मैं गीत लिख दूँ आज तुझ पर है उपेक्षित तू सदा से
    ठण्ड की रातों में सोता है खुली ठंडी सड़क पर।
    ठेके का रिक्शा खींच दिन भर”
    एक रिक्शा चालक पर इतनी करुणा और दया दिखलाती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही मार्मिक और भावुक अभिव्यक्ति वाली बहुत सुंदर कविता। गरीबों के लिए हृदय में दया भावना उत्पन्न करने वाली बहुत ही उत्तम प्रस्तुति

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