ठोकरें खाई हैं हमने

ह्रदय को कितनी चोट पहुंचती है तुम नहीं जानते
हम दिल के कमजोर हैं
यह भी तुम नहीं जानते
हमारी जिंदगी ने कभी
हमको खुशी नहीं दी
दर-दर की ठोकरें
खाई हैं हमने
यह भी तुम नहीं जानते
अपनी मेहनत से
हमने बुलंदियां हासिल की हैं
अपने आप की परवरिश
हमने खुद ही की है
हम तो बचपन से ही ताने खा खाकर ही बड़े हुए हैं
लोगों ने तो मारने की
बहुत कोशिश की
पर हम बेशर्म अब भी जी रहे हैं।।

Comments

2 responses to “ठोकरें खाई हैं हमने”

    1. धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करते हैं 

Leave a Reply

New Report

Close