डर लगता है

देखो तो मजमा आजकल उनका इधर लगता है
मतलब की है यारी, सर-बसर लगता है

कहते थे कभी मुल्क की आवाम के हैं सेवक
देखो तो आज बनारस ही उनका घर लगता है

कब्रिस्तान और श्मशान की हो रही बराबरी
बनाएंगे पूरे हिन्दुस्तां को, मुजफ्फरनगर लगता है

महंगा हुआ है खाना, महंगी है रसोई
शिद्दतों से आये अच्छे दिन का असर लगता है

आतंक और करप्शन तो हैं ही दर्द-अंगेज़
नए पनपते देशभक्तों से भर गया शहर लगता है

बंद लब कर, चुप बैठा है ‘विनायक’
डर है किसी बात से, अब ये कहने में भी डर लगता है।

Comments

6 responses to “डर लगता है”

    1. vinayak sharma Avatar
      vinayak sharma

      Thanks

  1. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    BAHOOT KHOOB

  2. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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