मैं ‘पत्थर’ हो गया हूँ पर वो पत्थर नहीं जिसे ‘पूजा’ जाय, बस एक ‘साधारण पत्थर’, पर साधारण पत्थर होना ही क्या ‘आसान’ है? देखने में आसान लग सकता है, पर वो पत्थर कभी ‘मैग्मा’ […]

सफ़र फासलों का है ये बड़ा दर्द भरा, गर हो मुम्किन,तो कोई और अज़ाब दो ना बड़ा नहीं देखूँगा तेरी सूरत मैं कभी, इन आँखों को कोई और पता दो ना ज़रा बातों-बातों में बनी […]

देखो तो मजमा आजकल उनका इधर लगता है मतलब की है यारी, सर-बसर लगता है कहते थे कभी मुल्क की आवाम के हैं सेवक देखो तो आज बनारस ही उनका घर लगता है कब्रिस्तान और […]

देश के इसी हालात पर तो रोना है, 69 साल हो गए आजादी के फिर भी आँखें भिगोना है, रो रहा कोई रोटी को और किसी के पास सोना-ही-सोना है, देश के इसी हालात पर […]

एक सुबह असामान्य सी हाँ, क्योंकि उस दिन मैं जल्द जग गया था, मैंने देखा था गुलाब के पत्तों पर शबनमी बूंदों को बेहद आकर्षक, अत्यन्त शीतल, काफी खूबसूरत थीं वो बूंदे, जिन्होंने, एक असामान्य […]

जब होश संभाला तो तुमसे जिंदगी को समझाया जाता था अब कुछ भी समझता हूँ तो तुम्हारा सृजन होता है जब मस्तिष्क का ताल दिल के तारों को छेड़ता है तो झंकृत हो तुम बाहर […]