ढूंढो मेरा प्रेम पथिक !

ढूंढो मेरा प्रेम पथिक !
जाने कहाँ खो गया है
कंकड़ीली-पथरीली राहों में
विस्मृत-सा हो गया है
उदासीन राहों में राही
तुम भी भटक ना जाना
मेरा प्रेम मिले जो कहीं
उसे मेरी याद दिलाना
देना मेरा हाल पता
उसकी भी सुध लेते आना
यदि वह माने बात तुम्हारी
तो अपने संग ही ले आना…

Comments

3 responses to “ढूंढो मेरा प्रेम पथिक !”

  1. Geeta kumari

    अपने प्रेमी को अपनी याद दिलाने की और उसे स्वयं से मिलवाने की किसी से गुज़ारिश करती हुई कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अति, अतिसुंदर रचना

Leave a Reply

New Report

Close