तक़दीर अपनी अपनी

हमें तो करोना ने लुटा, तक़दीर तो बहुत बलवान था।
एक दीप गलती से जली वहाँ, जहाँ आंधी तूफान था।।

Comments

4 responses to “तक़दीर अपनी अपनी”

  1. कविता के भाव बहुत अच्छे हैं । लेकिन बुरा मत मानियेगा, व्याकरणिक लिंगगत त्रुटियां हैं। जैसे तकदीर स्त्रीलिंग है उसे पुल्लिंग लिखा गया है और दीप पुल्लिंग है उसे स्त्रीलिंग लिखा गया है। शुद्ध रूप यह होगा-
    हमें तो कोरोना ने लूटा, तकदीर तो बहुत बलवान थी।
    एक दीप गलती से जला वहाँ, ,—–

  2. vikash kumar

    Great

  3. Amita Gupta

    Nice

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