हमें तो करोना ने लुटा, तक़दीर तो बहुत बलवान था।
एक दीप गलती से जली वहाँ, जहाँ आंधी तूफान था।।
तक़दीर अपनी अपनी
Comments
4 responses to “तक़दीर अपनी अपनी”
-

कविता के भाव बहुत अच्छे हैं । लेकिन बुरा मत मानियेगा, व्याकरणिक लिंगगत त्रुटियां हैं। जैसे तकदीर स्त्रीलिंग है उसे पुल्लिंग लिखा गया है और दीप पुल्लिंग है उसे स्त्रीलिंग लिखा गया है। शुद्ध रूप यह होगा-
हमें तो कोरोना ने लूटा, तकदीर तो बहुत बलवान थी।
एक दीप गलती से जला वहाँ, ,—– -
Great
-
वाह
-

Nice
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.