तक़दीर और तदबीर

जब तक़दीर से दोस्ती की, तब तदबीर ने मुझ से कहा।
मुझे मत छोड़ ए नादान गर मैं नहीं तो तकदीर कहाँ।।

Comments

6 responses to “तक़दीर और तदबीर”

  1. वाह क्या बात है

  2. ये बात तो सही है सर…बिना कर्म के नसीब भी कब तक साथ निभाएगा

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