तबाही ज़िन्दगी की

दिल ही तो मांगा था

कौन सी कायनात मांंग ली

जो शब्दो में उलझा कर

मेरे दिल को ताार तार दिया

गुनाह तो नही प्यार करना

जो मुुुझे तबाह कर दिया

Comments

3 responses to “तबाही ज़िन्दगी की”

  1. Geeta kumari

    कवियित्री नूरी जी की हृदय स्पर्शी पंक्तियां। मार्मिक अभिव्यक्ति

  2. Noorie Noor

    Thanku g pr mujhe lgta ha ki yha shayad log pdhne m km interested h s2 ya 3 logo se jyada koi padhta hi nhi

Leave a Reply

New Report

Close