तलब-ऐ-इश्क़

 

बड़ी तलब उठती है इस इश्क़ की दिल मैं मेरे कभी-कभी
याद आता है वो मुझे बेचैनी के साथ जब-जब ……………..!!

Comments

One response to “तलब-ऐ-इश्क़”

  1. Abhishek kumar

    मार्मिक सुन्दर रचना

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