कौन कहता है के हम सब कुछ पल दो पल में कर लेंगे,
हम तो मेहमाँ ही दो पल के पल दो पल में क्या कर लेंगे,
रहने दो ज्यादा से ज्यादा थोड़ा तो उथल पुथल कर लेंगे,
डूब समन्दर में जायेंगे और हम गंगा जल में घर कर लेंगे,
दिल का हाल बेहाल सुना है कहते हैं प्रेम सरल कर लेंगे,
अनपढ़ होकर लिखने वाले हम पूरी हर गज़ल कर लेंगे,
जिस दिन रेत पर चलने वाले रातों को मखमल कर लेंगे,
उसी समय से राही हम अपने सपने ताजमहल कर लेंगे,
राही अंजाना
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